Skip to content

कोरोनावाइरस या कोविड-19 लक्षण और बचाव


कोरोना वायरस का इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी से लिया गया चित्र

31 दिसंबर 2019 । यह दिन मानव सभ्यता के इतिहास में दर्ज हो गया , जब एक चाइनीज नेत्र चिकित्सक डॉक्टर ली वेन लियांग ने एक नए खतरे से पूरी दुनिया को आगाह किया और बताया कि एक छोटा सा विषाणु पूरी मानव सभ्यता के लिए भयानक खतरा बन गया है । चाइना के हुबेई प्रांत की राजधानी बुहान सिटी नामक शहर इस भयानक विषाणु आक्रमण का पहला ग्रास बना । लाशों पर लाशें गिरने लगी । जब तक चिकित्सा विज्ञानी कुछ समझ पाते बहुत देर हो चुकी थी । पूरी मानव सभ्यता के इतिहास में इस अनजाने वायरस का आक्रमण पहले कभी भी नहीं हुआ था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं कोविड -19

सम्पूर्ण मानवता के स्वास्थ्य पर पैनी निगाह रखने वाली हमारी वैश्विक संस्था , विश्व स्वास्थ्य संगठन का चिन्तित होना स्वाभाविक ही था। अपना दायित्व निभाते हुए आगे बढकर मार्गदर्शन करना प्रारंभ कर दिया। कोरोनावाइरस पर विशेषज्ञों की बैठकें और सेमिनार्स का आयोजन किया। निचोड़ में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जो बातें सुझायीं ,उसके अनुसार 12 फरवरी 2020 को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पूरी दुनिया में स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया । चाइना ने जिस बीमारी का नाम नोबेल कोरोनावायरस रखा था उस को संशोधित करते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसका नया नामकरण कोविड – 19 कर दिया। कोविड – 19 की व्याख्या इस प्रकार बताया , CO – CORONA , VI – VIRUS , D – DISEASE , 19 -2019 ।

कोरोना शब्द की उत्पत्ति

न्यू कोरोनावाइरस या कोविड -19

कोरोना लैटिन शब्द है जिसका अर्थ मुकुट होता है यानी इस वाइरस की बनावट मुकुट सरीखे होती है । धीरे-धीरे करके यह वायरस पूरी दुनिया में छा गया और पूरी मानव सभ्यता को लीलने की ओर अग्रसर होने लगा ।

कोरोना रोग के लक्षण

सामान्य सर्दी , खाँसी , बुखार , नाक बहना , छींक , सांस लेने में परेशानी , गले में खराश , थकान , सुस्ती , अत्यधिक कमजोरी , न्यूमोनिया , हर्टफेल , किडनी फ़ेल , आँतों में सड़न इत्यादि अनगिनत लक्षण पैदा होने के बाद अन्त में रोगी की मृत्यु और फिर नये रोगी की बारी। इस रोग की खासियत ही यही है कि सामान्य से लक्षणों को लेकर संक्रमित व्यक्ति मौत की ओर बढ़ने लगता है और उपलब्ध सारी चिकित्सा व्यवस्था किंकर्तव्यविमूढ़ हो जाती है और अन्त में रोगी मौत के मुँह में समा जाता है।

कोविड -19 का आणविक विश्लेषण

जहां चाइना के चिकित्सा विज्ञानी इस बीमारी पर मजबूर हैं और पूरी दुनिया के चिकित्सा शोधकर्ता अनथक परिश्रम करते हुए शोध कर रहे हैं , वहीं हमारे भारतीय चिकित्सा विज्ञानियों ने चाइना से केरल में आए 3 कोरोना ग्रस्त बीमार लोगों को पूर्ण स्वास्थ्य लाभ देकर के एक नई मिसाल पेश की और पूरी दुनिया के सामने भारतीय चिकित्सा विज्ञान का डंका बजा दिया ।

कोरोना रोग ग्रस्त हॉस्पिटल में चिकित्साकर्मी

कोरोनावायरस से बचने के उपाय

विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञों ने कोविड-19 से बचाव के लिए बहुत सारे उपाय बताए हैं –

  • सर्वप्रथम इसका वाइरस श्वसन संस्थान को ही प्रभावित करता है ।इसलिए मुँह पर हमेशा अच्छी क्वालिटी के मास्क का प्रयोग करें और एक बार प्रयुक्त मास्क का दुबारा प्रयोग न करें।
  • श्वसन संस्थान की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें विशेषतया छींकते या खाँसते समय ।
  • हाथ को साबुन और अल्कोहल मिश्रित जल से अच्छी तरह से रगड़ – रगड़ कर धुलें। अल्कोहल मिश्रित जल में कोविड -19 वाइरस को मारने की अद्भुत क्षमता है।
  • आँख, नाक और मुँह को स्पर्श करने से भरसक बचें।
  • खाँसी-बुखार और श्वांस से सम्बंधित तकलीफ़ होने पर तुरन्त डॉक्टर से संपर्क करें और लापरवाही से बचें ।
  • मांसाहार से पूर्णतया बचें क्योंकि यह वाइरस चाईना के मीट मार्केट से ही फैला है ।

पिछले दिनों जब मैं इस ब्लॉग को लिख रहा था ठीक उसी समय चाइना से एक बार फिर एक दुखद समाचार आया कि बुचांग अस्पताल के निदेशक डा0 लिउ झिमिंग की मौत कोरोना वाइरस के संक्रमण से हो गई है। यह असामयिक काल का भयानक ताण्डव दिखाने वाला विषाणु अनगिनत लोगों के साथ ही अभी और कितने चिकित्साकर्मियों का बलिदान लेगा ? यह निरूत्तर प्रश्न अभी भविष्य के गर्भ में ही है ।

कोरोनावायरस और क्लासिकल होम्योपैथी

जनमानस में यह बड़ा यक्ष-प्रश्न है कि क्या होमियोपैथी के पास इसका जवाब है ? उत्तर हाँ में है। कोविड 19 क्या ! ! भविष्य में जितनी भी स्वास्थ्य से सम्बंधित गंभीरतम चुनौतियां आयेंगी होमियोपैथी के पास उसका माकूल जवाब होगा । भारतीय होमियोपैथिक चिकित्सा जगत इसके लिए पूरा पूरा तैयार बैठा है।

DR. SACHCHIDANAND SRIVASTVA View All

CLASSICAL HOMOEOPATHIC PHYSICIAN

%d bloggers like this: